अध्याय 1: सोयाबीन का परिचय और इतिहास - चीन से भारत तक का सफर और 'पीला सोना' का अर्थशास्त्र।
अध्याय 2: वैश्विक परिदृश्य - अमेरिका और ब्राजील में बंपर पैदावार के कारण, जीएम (GM) बीज और प्रिसिजन फार्मिंग।
अध्याय 3: भारत की चुनौतियां - कम उत्पादन के वैज्ञानिक कारण, जलवायु परिवर्तन और 'सोयल सिकनेस' (Soil Sickness)।
अध्याय 4: बीजों का सफर - पुरानी किस्मों का पतन और नई किस्मों (JS 20-34, NRC सीरीज) का चयन।
अध्याय 5: भौगोलिक विस्तार और समय - भारत के प्रमुख क्षेत्र और वसंतकालीन (Spring) सोयाबीन की संभावनाएं।
अध्याय 6: प्लांट फिजियोलॉजी - फ्लावर ड्रॉप (Flower Drop) का विज्ञान और प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स (PGR) का प्रयोग।
अध्याय 7: जल प्रबंधन - BBF (Broad Bed Furrow) पद्धति और ड्रेनेज (Drainage) तकनीक।
अध्याय 8: मृदा सूक्ष्मजीव विज्ञान - राइजोबियम (Rhizobium), नाइट्रोजन फिक्सेशन और बायोलॉजिकल हेल्थ।
अध्याय 9: केमिकल लॉजिक - IRAC, FRAC और HRAC का ज्ञान। मोड ऑफ एक्शन के हिसाब से स्प्रे का समय।
अध्याय 10: कीट और रोग प्रबंधन - गर्डल बीटल, सेमीलूपर और येलो मोज़ेक वायरस (YMV) का वैज्ञानिक निदान।
अध्याय 11: एग्री-टेक (Agri-Tech) और भविष्य - ड्रोन का प्रयोग और डेटा-आधारित खेती।
अध्याय 12: कटाई और बीज उत्पादन - नमी (Moisture content) का ध्यान और स्वयं का प्रमाणित बीज तैयार करना।
अध्याय 13: मार्केटिंग और उद्यमिता - किसान से 'एग्री-बिजनेस ओनर' बनने का सफर और ब्रांडिंग।
विशेष चेतावनी: रोग एवं कीट प्रबंधन
- येलो मोज़ेक वायरस (YMV): वायरस का इलाज नहीं है। वाहक (सफेद मक्खी) को नियंत्रित करें और रोगग्रस्त पौधे तुरंत उखाड़ें।
- गर्डल बीटल: तने पर दो रिंग का निशान देखते ही सही IRAC आधारित सिस्टेमिक कीटनाशक का प्रयोग करें।